सुमन न अपने परिवार के साथ एक गांव में रहती थी उसके परिवार में उसके माता-पिता उसकी दादी और छोटा भाई दीपू रहते थे घर के सभी लोग दीपू से बहुत प्यार करते थे और उसकी प्रत्येक इच्छा को पूरा करने में लगे रहते थे इसके विपरीत सुमन की छोटी-छोटी इच्छाओं को भी अनुष्का कर दिया जाता था दीपू 5 वर्ष का हो गया था इसलिए उनके पिता ने उसका दिखा लावा गांव की स्कूल में करवा दिया इधर सुमन भी 8 वर्ष की हो चुकी थी पर घर में किसी को उसी स्कूल भेजने की चिंता नहीं थी दीपक को प्रत्येक दिन तैयार होकर स्कूल जाते हुए देख कर सुमन का मन भी स्कूल जाने के लिए मचलने लगा एक दिन दीपू अपना-अपना भूल गया ऐसे में लेकर उसके स्कूल में अध्यापिका रही थी ब्लैक बोर्ड पर लिखा था और उसका हाल भी पूछ रही थी कक्षा में कुछ बच्चे चुप बैठे थे तो कुछ बच्चे गलत उत्तर दे रहे थे सुमन ने ब्लैक बोर्ड की ओर देखा अचानक उसके मुख से निकला अरे यह तो बहुत आसान है मुझे इसका उत्तर मालूम है अध्यापिका ने मुड़कर सुमन की ओर देखा और उसे पहचान कर उसने उस प्रश्न का उत्तर बताने के लिए कहा अध्यापिका की बात सुनकर पहले तो सुमन शक पका गई और फिर धीरे से बोलती 3 प्लस 3 प्लस 3 होते हैं नो उसका उत्तर सुनकर अध्यापिका बोली सा बस तुम तो बहुत होशियार हो कौन सी कक्षा में पढ़ती हो रिया पिता का प्रेम शंकर सुमन ने अपना सिर झुका लिया तभी दीपू खड़ा होकर बोला मैडम यही स्कूल में नहीं पढ़ती क्यों अध्यापिका ने पूछा सुमन धीरे से बोली क्योंकि दादी कहती है कि पढ़ना लिखना केवल लड़कों का काम है लड़कियों को घर में रहनी चाहिए इतना का करिश्मा से चलेगी शाम को सामान का परिवार आंगन में बैठा रहता है वहां के नमस्ते का उत्तर देने के बाद उन्होंने मन पढ़ाई में बहुत तेज है आप लोग सुमन को स्कूल क्यों नहीं भेजते मां बोली भला यह पढ़ लिख कर क्या करेगी आखिर में इसको तो विवाह करके अपने ससुराल ही जाना होगा ना इसे कौन सा हमारा नाम रोशन करना है फिर इसकी पढ़ाई के लिए फालतू पैसे खर्च करने से क्या लाभ यह सुनकर अध्यापिका बोली शिक्षा पर सब बच्चों का पूर्ण अधिकार है वैसे भी आजकल लड़कियां किसी भी क्षेत्र में लड़कों से पीछे नहीं है कल सुमन भी पढ़ लिखकर कुछ बन जाएगी तो आपका नाम रोशन करेगी फिर आजकल तो लड़कियों की शिक्षा पर अधिक रुपए खर्च करने की भी आवश्यकता नहीं है क्या आपको
शनिवार, 5 सितंबर 2020
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