हमारेहमारे गांव पूर्व दिशा की ओर में एक गांव है जिसका नाम मंड है बहुत समय पहले इस गांव में एक बालक अपने माता पिता के साथ रहता था वह बालक प्रतिदिन अपने स्कूल जाते समय एक चौराहे से गुजरता था उस चौराहे पर एक बुड्ढी भिखारिन
बैठकर आते जाते लोगों से भीख मांगती थी परंतु अधिकतर लोग उसके बाद अनसुनी कर देते थे 1 दिन उस बालक ने उस बूढ़ी भिखारिन को देखा तो उसे उस पर दया आ गई उसने उस बूढ़ी भिखारिन को अपने खाने के डिब्बे में से ₹2 निकाल कर दी उस बुढ़िया ने बालक को ढेरों आशीर्वाद दिए उस दिन के बाद तो प्रतिदिन का यही कारण बन गया बालक आकर गुड़िया को दो रोटियां देता और गुड़िया से आशीर्वाद इसी प्रकार कई दिन बीत गई एक दिन जब वह बालक उस चौराहे के पास से गुजरता तो उसे मामूली भिखारिन का ही नहीं दिखी वह चुपचाप अपने स्कूल की ओर बढ गया परंतु उस दिन उसका मन पढ़ाई में बिल्कुल नहीं लगा उसने खाने के समय अपने डिब्बे में दो रोटियां बूटी भिखारिन के लिए बचा कर रख दी स्कूल से वापसी में भी उसे पूरी या कहीं नहीं दिखाई घर जाकर उसने उस बुढ़िया के लिए बचाई गई रोटी अपनी अलमारी में छिपा दी लेकिन उसकी बेचैनी कम नहीं हुई आसान होने पर बूटी भिखारिन को खोजने दोबारा चौराहे पर गया लोगों से पूछताछ करने पर उसे पता चला कि कल रात ही भिखारी मर गई है सुनकर बालक पास होकर अपने घर लौट गया इधर घर पर वाला उसके कमरे में पहुंची तो उन्होंने देखा कि बहुत सारी चीजों की अलमारी और जा रही थी या देखकर उन्हें खुली तो पाया कि उसमें दो रोटियां रखी थी तभी बालक कमरे में आया उसे देखा क्रोधित होकर बोली तुमने अलमारी में क्यों रखी है देखो यहां चोट आ गई है तुमने अपना खाना क्यों नहीं खाया मां की बात सुनते ही बालक का करम है उसे कुछ करते हुए पूछा क्या क्या बात है क्यों रो रहे हो तुम बालक रोते-रोते बोला मुंह में प्रतिदिन अपने स्कूल के खाने में से दो रोटियां बचाकर एक बूढ़ी भिखारिन को देता था पर आज वह मुझे नहीं मिली जब मैं उसे ढूंढने गया तो लोगों ने बताया कि कल रात हुआ भिखारी मर गई बालक की बातें सुनकर मां का मन भर गया उन्होंने वालों को अपने गले लगाते हुए का बेटा तुम मनुष्य नहीं अब तार हो तुम्हारे जैसा बेटा पाकर मैं धन्य हो गई बच्चों के आया आप जानते हैं कि यह उदार हृदय वाला कोई और नहीं वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे जिन्हें में भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपना अहम योगदान दिया था
